कबीर के अनमोल वचन
लेखक: कथा कहानी टीम | 25 July 2026, 02:56 PM | 8 व्यूज़

संत कबीरदास हिंदी साहित्य की निर्गुण भक्ति परंपरा के महान संत और समाज सुधारक थे। उन्होंने अपने दोहों के माध्यम से प्रेम, सत्य, गुरु, विनम्रता और आत्मज्ञान का संदेश दिया। सरल भाषा में कही गई उनकी बातें आज भी जीवन की गहरी सच्चाइयों से परिचित कराती हैं।
कबीर के प्रसिद्ध दोहे और उनके अर्थ
1. बुरा जो देखन मैं चला
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥
अर्थ: दूसरों की कमियां खोजने से पहले हमें अपने व्यवहार और गलतियों की जांच करनी चाहिए।
2. काल करे सो आज कर
काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।
पल में परलय होएगी, बहुरि करेगा कब॥
अर्थ: जरूरी काम को कल पर नहीं टालना चाहिए, क्योंकि बीता हुआ अवसर वापस नहीं आता।
3. धीरे-धीरे रे मना
धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय।
माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय॥
अर्थ: हर कार्य को पूरा होने में उचित समय लगता है। मेहनत के साथ धैर्य रखना भी जरूरी है।
4. निंदक नियरे राखिए
निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाय।
बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय॥
अर्थ: सही आलोचना हमें अपनी कमियां पहचानने और स्वभाव सुधारने में सहायता करती है।
5. ऐसी वाणी बोलिए
ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय।
औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होय॥
अर्थ: हमारी भाषा विनम्र और मधुर होनी चाहिए, जिससे दूसरों को दुख न पहुंचे और स्वयं को भी शांति मिले।
6. पोथी पढ़ि-पढ़ि जग मुआ
पोथी पढ़ि-पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय।
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय॥
अर्थ: केवल पुस्तकीय ज्ञान पर्याप्त नहीं है। प्रेम और मानवता को समझना ही सच्चा ज्ञान है।
7. दुख में सुमिरन सब करें
दुख में सुमिरन सब करें, सुख में करे न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे, दुख काहे को होय॥
अर्थ: ईश्वर और अच्छे मूल्यों को केवल संकट के समय नहीं, बल्कि सुख के समय भी याद रखना चाहिए।
8. गुरु गोविंद दोऊ खड़े
गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागू पाय।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय॥
अर्थ: गुरु का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि गुरु ही ज्ञान और ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग दिखाते हैं।
9. माला फेरत जुग भया
माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर।
कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर॥
अर्थ: केवल बाहरी धार्मिक क्रियाएं पर्याप्त नहीं हैं। वास्तविक परिवर्तन मन और व्यवहार में होना चाहिए।
10. साईं इतना दीजिए
साईं इतना दीजिए, जामे कुटुम समाय।
मैं भी भूखा न रहूं, साधु न भूखा जाय॥
अर्थ: मनुष्य को उतना ही धन मांगना चाहिए, जिससे उसकी जरूरतें पूरी हों और वह दूसरों की सहायता भी कर सके।
कबीर की शिक्षाओं का महत्व
कबीरदास ने धार्मिक आडंबर, जातिगत भेदभाव और अहंकार का विरोध किया। उनका मानना था कि ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग प्रेम, सत्य और निर्मल मन से होकर जाता है। उनके दोहे हमें बाहरी दिखावे के बजाय अपने विचारों और व्यवहार में सुधार लाने की प्रेरणा देते हैं।
निष्कर्ष
कबीर के दोहे छोटे होते हुए भी जीवन का गहरा ज्ञान समेटे हुए हैं। वे हमें धैर्य रखने, मधुर वाणी बोलने, समय की कद्र करने और अपनी कमियों को पहचानने की सीख देते हैं।
